प्रभु ईसू पर ईमान नहीं रखती, या मुझे उन पर श्रध्दा नहीं है। मैं उन्हें महान् आदर्श पुरुष और क्षमा तथा दया का अवतार समझती हूँ, और समझती रहूँगी।

ईश्वर सेवक ने सोफ़िया के कपोलों का चुम्बन करके कहा-बस, मेरा चित्ता शांत हो गया। ईसू तुझे अपने दामन में लें। मैं बैठता हूँ, मुझे ईश्वर-वाक्य सुना, कानों को प्रभु मसीह की वाणी से पवित्र कर।

सोफ़िया इनकार न कर सकी। 'उत्पत्ति' का एक परिच्छेद खोलकर पढ़ने लगी। ईश्वर सेवक ऑंखें बंद करके कुर्सी पर बैठ गए और तन्मय होकर सुनने लगे। मिसेज़ सेवक ने यह दृश्य देखा और विजयगर्व से मुस्कराती हुई चली गईं।

यह समस्या तो हल हो गई; पर ईश्वर सेवक के मरहम से उसके अंत:करण का नासूर न अच्छा हो सकता था। आए-दिन उसके मन में धार्मिक शंकाएँ उठती रहती थीं और दिन-प्रतिदिन उसे अपने घर में रहना दुस्सह होता


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पेट पालते हैं। सच्ची कमाई उन्हीं की है, जो छाती फाड़कर धरती से धान निकालते हैं।

बजरंगी ने बात तो कही, लेकिन लज्जित हुआ। इस लपेट में वहाँ के सभी आदमी आ जाते थे। वह भैरों, जगधार और ठाकुरदीन को लक्ष्य करना चाहता था, पर सूरदास, नायकराम, दयागिरि, सभी पापियों की श्रेणी में आ गए।

नायकराम-तब तो भैया, तुम हमें भी ले बीते। एक पापी तो मैं ही हूँ कि सारे दिन मटरगस्ती करता हूँ, और वह भोजन करता हूँ कि बड़ों-बड़ों को मयस्सर न हो।

ठाकुरदीन-दूसरा


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