बंद है, तो भी मैं आत्मा को बेचने की अपेक्षा भूखों मर जाना कहीं अच्छा समझती हूँ।
प्रभु सेवक-दुनिया उससे कहीं तंग है, जितना तुम समझती हो।
सोफ़िया-कब्र के लिए तो जगह निकल ही आएगी।
सहसा ईश्वर सेवक ने जाकर उसे छाती से लगा लिया, और अपने भक्ति-गद्गद नेत्रा-जल से उसके संतप्त हृदय को शांत करने लगे। सोफ़िया को उनकी श्रध्दालुता पर दया आ गई। कौन ऐसा निर्दय प्राणी है, जो भोले-भाले बालक के कठघोड़े का उपहास करके उसका दिल दु:खाए, उसके मधुर स्वप्न को विशृंखल कर दे?
सोफ़िया ने कहा-दादा, आप आकर इस कुर्सी पर बैठ जाएँ, खड़े-खड़े आपको तकलीफ होती है।
ईश्वर सेवक-जब तक तू अपने मुख से न कहेगी कि मैं प्रभु मसीह पर विश्वास करती हूँ, तब तक मैं तेरे द्वार पर, यों ही, भिखारियों की भाँति खड़ा रहूँगा।
सोफ़िया-दादा, मैंने यह कभी नहीं कहा कि मैं
भैरों-हाल तो यह है कि घरवाली सेर के तीन सेर बनाती है, उस पर दावा यह कि हम सच्चा माल बेचते हैं। सच्चा माल बेचो, तो दिवाला निकल जाए। यह ठाट एक दिन न चले।
बजरंगी-पसीने की कमाई खानेवालों का दिवाला नहीं निकलता; दिवाला उनका निकलता है, जो दूसरों की कमाई खा-खाकर मोटे पड़ते हैं। भाग को सराहो कि शहर में हो; किसी गाँव में होते, तो मुँह में मक्खियाँ आतीं-जातीं। मैं तो उन सबोंकों को पापी समझता हूँ, जो औने-पौने करके, इधार का सौदा उधार बेचकर अपना