संकीर्णता से दूर रहने के कारण ये नाम दिए जाते हैं, तो मुझे स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं है।
मिसेज़ सेवक से अब जब्त न हो सका। अभी तक उन्होंने कातिल वार न किया था। मातृस्नेह हाथों को रोके हुए था। लेकिन सोफ़िया के वितंडावाद ने अब उनके धैर्य का अंत कर दिया! बोलीं-प्रभु मसीह से विमुख होनेवाले के लिए इस घर में जगह नहीं है।
प्रभु सेवक-मामा, आप घोर अन्याय कर रही हैं। सोफ़िया यह कब कहती है, कि मुझे प्रभु मसीह पर विश्वास नहीं है?
मिसेज़ सेवक-हाँ, वह यही कह रही है, तुम्हारी समझ का फेर है। ईश्वर-ग्रंथ पर ईमान न लाने का और क्या अर्थ हो सकता है? इसे प्रभु मसीह के अलौकिक कृत्यों पर अविश्वास और उनके नैतिक उपदेशों पर शंका है। यह उनके प्रायश्चित्त के तत्तव को नहीं मानती, उनके पवित्र आदेशों को स्वीकार नहीं करतीं।
प्रभु सेवक-मैंने इसे मसीह के आदेशों का उल्लंघन करते कभी नहीं देखा।
तो इसी घड़ी तुमको वकालत की सनद दे देता। ठाकुरदीन, अब हार मान जाओ, भैरों से पेश न पा सकोगे।
जगधार-भैरों, तुम चुप क्यों नहीं हो जाते? पंडाजी को तो जानते हो, दूसरों को लड़ाकर तमाशा देखना इनका काम है। इतना कह देने में कौन-सी मरजादा घटी जाती है कि बाबा, तुम जीते और मैं हारा।
भैरों-क्यों इतना कह दूँ? बात करने में किसी से कम हूँ क्या?
जगधार-तो ठाकुरदीन, तुम्हीं चुप हो जाओ।
ठाकुरदीन-हाँ जी, चुप न हो जाऊँगा, तो क्या करूँगा। यहाँ आए थे कि