निकला हुआ एक अनर्गल शब्द भी उसके समस्त जीवन का सर्वनाश कर सकता है। नर्म होकर बोली-हाँ, इस विचार-दृष्टि से बेशक वैयक्तिक जीवन का कोई मूल्य नहीं रहता। मेरी निगाह इस पहलू पर न गई थी। मगर फिर भी इतना कह सकती हूँ कि अगर वह मुक्त कर दिया जाए, तो फिर इस रियासत में कदम न रखेगा, और मैं यह निश्चय रूप से कह सकती हूँ कि वह अपनी बात का धानी है। नीलकंठ-क्या आपसे उसने वादा किया है? सोफी-हाँ, वादा ही समझिए, मैं उसकी जमानत कर सकती हूँ। नीलकंठ-इतना तो मैं भी कह सकता हूँ कि वह अपने वचन से फिर नहीं सकता। क्लार्क-जब तक उसका लिखित प्रार्थना-पत्रा मेरे सामने न आए, मैं इस विषय में कुछ नहीं कर सकता। नीलकंठ-हाँ, यह तो परमावश्यक ही है। सोफी-प्रार्थना-पत्रा का विषय क्या होगा? क्लार्क-सबसे पहले वह अपना अपराधा स्वीकार करे और अपनी
न होगा। सारी रात जॉन सेवक इसी उधोड़बुन में पड़े रहे। एकाएक उन्हें एक बात सूझी। चेहरे पर मुस्कराहट की झलक दिखाई दी। सम्भव है, यह चाल सीधी पड़ जाए, तो फिर बिगड़ा हुआ काम सँवर जाए। सुबह को हाजिरी खाने के बाद फिटन तैयार कराई और पाँड़ेपुर चल दिए।
नायकराम ने पैरों में पट्टियाँ बाँध ली थीं, शरीर में हल्दी की मालिश कराए हुए थे, एक डोली मँगवा रखी थी और राजा महेंद्रकुमार के पास जाने को तैयार थे। अभी मुहूर्त में दो-चार पल की कसर थी। बजरंगी