करके देखो। उसके आधयात्मिक और दार्शनिक विचार सुनकर चकित हो जाओगे। साधाु भी है और दार्शनिक भी। कहीं हम उसके विचारों को व्यवहार में ला सकते, तो निश्चय सांसारिक जीवन सुखमय हो जाता। जाहिल है, बिल्कुल निरक्षर; लेकिन उसका एक-एक वाक्य विद्वानों के बड़े-बड़े ग्रंथों पर भारी है। मोटर चली, तो सोफी बोली-आप लोग ऐसे साधाुजनों पर भी अन्याय करने से बाज नहीं आते, जो अपने शत्राुओं पर एक कंकड़ भी उठाकर नहीं फेंकता। प्रभु मसीह में भी तो यही गुण सर्वप्रधाान था। क्लार्क-प्रिये, अब लज्जित न करो। इसका प्रायश्चित्ता निश्चय होगा। सोफी-राजा साहब इसका घोर विरोधा करेंगे। क्लार्क-थुह! उनमें इतना नैतिक साहस नहीं है। वह जो कुछ करते हैं, हमारा रुख देखकर करते हैं। इस वजह से उन्हें कभी असफलता नहीं होती। हाँ, उनमें यह विशेष गुण है कि वह हमारे प्रस्तावों का रूपांतर करके अपना काम
प्रभु सेवक-अच्छा! इस अंधे के पास रुपये भी हैं?
भैरों-हुजूर, बिना रुपये के इतनी गरमी और कैसे होगी! जब पेट भरता है, तभी तो बहू-बेटियों पर निगाह डालने की सूझती है।
प्रभु सेवक-बेकार क्या बकता है, अंधा आदमी क्या बुरी निगाह डालेगा? मैंने तो सुना है, वह बहुत सीधा-सादा आदमी है।
भैरों-आपका कुत्ता आपको थोड़े ही काटता है, आप तो उसकी पीठ सुहलाते हैं; पर जिन्हें काटने दौड़ता है, वे तो उसे इतना सीधा न समझेंगे।
इतने में भैरों की दूकान आ गई। ग्राहक