कमाना एक बात है, उसका सद्व्यय करना दूसरी बात। होशियार आदमी उसे कहते हैं, जो धान का उचित उपयोग करे। इधार से लाकर उधार खर्च कर दिया, तो क्या फायदा? इससे तो न लाना ही अच्छा। समझाता ही रहा; पर इतनी ऊँची रास का घोड़ा ले लिया। इसकी क्या जरूरत थी? तुम्हें घुड़दौड़ नहीं करना है। एक टट्टू से काम चल सकता था। यही न कि औरों के घोड़े आगे निकल जाते, तो इसमें तुम्हारी क्या शेखी मारी जाती थी। कहीं दूर जाना नहीं पड़ता। टट्टू होता, छ: सेर की जगह दो सेर दाना खाता। आखिर चार सेर दाना व्यर्थ ही जाता है न? मगर मेरी कौन सुनता है? ईसू, मुझे अपने दामन में छुपा। सोफी, यहाँ आ बेटी, कलामेपाक सुना।

सोफ़िया प्रभु सेवक के कमरे में बैठी हुई उनसे मसीह के इस कथन पर शंका कर रही थी कि गरीबों के लिए आसमान की बादशाहत है, और अमीरों का स्वर्ग में जाना उतना


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सिर चढ़ाना अच्छा नहीं। गोद में लादे फिरते हो, जैसे नन्हा-सा बालक हो। मेरा विद्याधार इससे दो साल छोटा है। मैं उसे कभी गोद में लेकर नहीं फिरता।

सूरदास-बिना माँ-बाप के लड़के हठी हो जाते हैं। हाँ, क्या होगा?

दयागिरि-पहले रामायण की एक चौपाई हो जाए।

लोगों ने अपने-अपने साज सँभाले। सुर मिला और आधा घंटे तक रामायण हुई।

नायकराम-वाह सूरदास वाह! अब तुम्हारे ही दम का जलूसा है।

बजरंगी-मेरी तो कोई दोनों ऑंखें ले ले, और यह हुनर मुझे दे दे, तो मैं खुशी से बदल लूँ।


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