ईसाई बैरिस्टर ने क्लार्क से कहा-मेरे विचार में व्यक्तिगत लाभ के लिए किसी की जमीन पर कब्जा करना मुनासिब नहीं है।

क्लार्क-बहुत अच्छा मुआवजा दिया गया है।

बैरिस्टर-आप किसी को मुआवजा लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकते, जब तक आप यह न सिध्द कर दें कि आप जमीन को किसी सार्वजनिक कार्य के लिए ले रहे हैं।

काशी आयरन वक्र्स के मालिक मिस्टर जॉन बर्ड ने, जो जॉन सेवक के पुराने प्रतिद्वंद्वी थे, कहा-बैरिस्टर साहब, क्या आपको नहीं मालूम है कि सिगरेट का कारखाना खोलना परम परमार्थ है? सिगरेट पीनेवाले आदमी को स्वर्ग पहुँचने में जरा भी दिक्कत नहीं होती।

प्रोफेसर चार्ल्स सिमियन, जिन्होंने सिगरेट के विरोध में एक पैंफ्लेट लिखा था, बोले-अगर सिगरेट के कारखाने के लिए सरकार जमीन दिला सकती है, तो कोई कारण नहीं है कि चकलों के लिए न दिलाए। सिगरेट के कारखाने के लिए जमीन पर


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जगधार-सूरे, अगर तुम भरी गंगा में कहो कि मेरे रुपये नहीं है, तो मैं न मानूँगा। मैंने अपनी ऑंखों से वह थैली देखी है। भैरों ने अपने मुँह से कहा है कि यह थैली झोंपड़े में धारन के ऊपर मिली। तुम्हारे बात कैसे मान लूँ?

सुभागी-तुमने थैली देखी है?

जगधार-हाँ, देखी नहीं तो क्या झूठ बोल रहा हूँ?

सुभागी-सूरदास, सच-सच बता दो, रुपये तुम्हारे हैं!

सूरदास-पागल हो गई है क्या? इनकी बातों में आ जाती है! भला मेरे पास रुपये कहाँ से आते?

जगधार-इनसे पूछ, रुपये न थे, तो इस घड़ी राख बटोरकर क्या ढूँढ़ रहे थे?


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