हैं, तब से इसी दौड़-धूप में हैं कि आपको यहाँ से निकाल ले जाएँ। यह जगह आप-जैसे धर्मपरायण, निर्भीक और स्वाधीनता पुरुषों के लिए उपयुक्त नहीं है। यहाँ उसी का निबाह है, जो पल्ले दर्जे का घाघ, कपटी, पाखंडी और दुरात्मा हो, अपना काम निकालने के लिए बुरे-से-बुरा काम करने से भी न हिचके।
विनयसिंह ने बड़े गर्व से उत्तर दिया-अगर तुम्हारी बातें अक्षरश: सत्य हों, तो भी मैं कोई ऐसा काम न करूँगा, जिससे रियासत की बदनामी हो। मुझे अपने भाइयों के साथ में विष का प्याला पीना मंजूर है; पर रोकर उनको संकट में डालना मंजूर नहीं। इस राज्य को हम लोगों ने सदैव गौरव की दृष्टि से देखा है, महाराजा साहब को आज भी हम उसी श्रध्दा की दृष्टि से देखते हैं। वह उन्हीं सांगा और प्रताप के वंशज हैं, जिन्होंने हिंदू-जाति की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। हम महाराजा को अपना रक्षक,
भैरों-नहीं, यह बात नहीं। नसा खाने से बल का नास हो जाता है।
जगधार-कैसी उलटी बातें करते हो; ऐसा होता, तो फौज में गोरों को बारांडी क्यों पिलाई जाती? अंगरेज सभी शराब पीते हैं, तो क्या कमज़ोर होते हैं?
भैरों-आज सुभागी आती है, तो गला दबा देता हूँ।
जगधार-किसी के घर में छिपी बैठी होगी।
भैरों-अंधे ने मेरी आबरू बिगाड़ दी। बिरादरी में यह बात फैलेगी, तो हुक्का बंद हो जाएगा, भात देना पड़ जाएगा।
जगधार-तुम्हीं तो ढिंढोरा पीट रहे हो। यह नहीं, पटकनी