'तुम वीरपालसिंह को जानते हो?'
'इतना ही जानता हूँ कि वह मुझे रास्ते में मिल गया, वहाँ से कहाँ गया, यह मैं नहीं जानता।'
'तुम्हें यह मालूम था कि वह डाकू है?'
'उसने यहाँ के राजकर्मचारियों के विषय में इसी शब्द का प्रयोग किया था।'
'इसका आशय मैं यह समझता हूँ कि तुम्हें यह बात मालूम थी।'
'आप इसका जो आशय चाहें, समझें।
'उसने यहाँ से तीन मील पर सरकारी खजाने की गाड़ी लूट ली है और एक सिपाही की हत्या कर डाली है। पुलिस को संदेह है कि यह संगीन वारदात तुम्हारे इशारे से हुई है। इसलिए हम तुम्हें गिरफ्तार करते हैं।'
'यह मेरे ऊपर घोर अन्याय है। मुझे उस डाके और हत्या की जरा भी खबर नहीं है।'
'इसका फैसला अदालत से होगा।'
'कम-से-कम मुझे इतना पूछने का अधिकार तो है कि पुलिस को मुझ पर यह संदेह करने का क्या कारण है?'
ने धोती ऊपर चढ़ा ली और सूरदास से लिपट गया। सूरदास ने उसकी एक टाँग पकड़ ली और इतनी जोर से खींचा कि जगधार धाम से गिर पड़ा। चारों तरफ से तालियाँ बजने लगीं।
बजरंगी बोला-वाह, सूरदास, वाह! नायकराम ने दौड़कर उसकी पीठ ठोंकी।
भैरों-मुझे तो कहते थे, एक ही झपट्टे में गिरा दोगे, तुम कैसे गिर गए?
जगधार-सूरे ने टाँग पकड़ ली, नहीं तो क्या गिरा लेते। वह अड़ंगा मारता कि चारों खाने चित गिरते।
नायकराम-अच्छा, तो एक बाजी और हो जाए।
जगधार-हाँ-हाँ, अबकी देखना।