कमिश्नर ने कुछ नरम होकर कहा-गवर्नमेंट के हर एक कर्मचारी का धर्म है कि किसी को अपने ऊपर ऐेसे इलजाम लगाने का अवसर न दे।
राजा साहब-मैं जानता हूँ आप लोगों को यह किसी तरह भूल नहीं सकते कि मैं भारतवासी हूँ, इसी प्रकार मेरे बोर्ड के सहयोगियों के लिए यह भूल जाना असम्भव है कि मैं शासन का एक अंग हूँ। आप जानते हैं कि मैं बोर्ड में मिस्टर जॉन सेवक को पाँड़ेपुर की जमीन दिलाने का प्रस्ताव करनेवाला हूँ; लेकिन जब तक मैं अपने आचरण से यह सिध्द न कर दूँगा कि मैंने स्वत:, बगैर किसी दबाव के, केवल प्रजा के हित के लिए यह प्रस्ताव उपस्थित किया है, उसकी स्वीकृति की कोई आशा नहीं है। यही कारण है, जो मुझे कल स्टेशन पर ले गया था।
कमिश्नर की बाँछें खिल गईं। हँस-हँसकर बातें बनाने लगा।
राजा साहब-ऐसी दशा में क्या आप समझते हैं, मेरा जवाब देना जरूरी है?
सहसा साबिर ने आकर जैनब से कहा-आपको अब्बा बुलाते हैं। जैनब वहाँ गई, तो ताहिर अली को पड़े कराहते देखा। कुल्सूम से बोली-बीबी, गजब का तुम्हारा जिगर है। अरे भले आदमी, जाकर जरा मूँग का दलिया पका दे। गरीब ने रात को कुछ नहीं खाया, इस वक्त भी मुँह में कुछ न जाएगा, तो क्या हाल होगा?
ताहिर-नहीं, मेरा कुछ खाने को जी नहीं चाहता। आपको इसलिए तकलीफ दी है कि अगर आपके पास कुछ रुपये हों, तो मुझे कर्ज के तौर पर दे दीजिए। मेरे कंधों में बड़ा दर्द