भैरों-नहीं, यह बात नहीं। नसा खाने से बल का नास हो जाता है।
जगधार-कैसी उलटी बातें करते हो; ऐसा होता, तो फौज में गोरों को बारांडी क्यों पिलाई जाती? अंगरेज सभी शराब पीते हैं, तो क्या कमज़ोर होते हैं?
भैरों-आज सुभागी आती है, तो गला दबा देता हूँ।
जगधार-किसी के घर में छिपी बैठी होगी।
भैरों-अंधे ने मेरी आबरू बिगाड़ दी। बिरादरी में यह बात फैलेगी, तो हुक्का बंद हो जाएगा, भात देना पड़ जाएगा।
जगधार-तुम्हीं तो ढिंढोरा पीट रहे हो। यह नहीं, पटकनी खाई थी, तो चुपके से घर चले आते। सुभागी घर आती तो उससे समझते। तुम लगे वहीं दुहाई देने।
भैरों-इस अंधे को मैं ऐसा कपटी न समझता था, नहीं तो अब तक कभी उसका मजा चखा चुका होता। अब उस चुड़ैल को घर में न रखूँगा। चमार के हाथों यह बेआबरुई!
जगधार-अब इससे बड़ी और क्या बदनामी होगी, गला काटने का काम है।
ताहिर-मुझे हुजूर की खिदमत से इनकार थोड़े ही है, मैं तो सिर्फ...
मिसेज़ सेवक-आपको हमारी प्रत्येक आज्ञा का पालन करना पड़ेगा, चाहे उससे आपका खुदा खुश हो या नाखुश। हम अपने कामों में आपके खुदा को हस्तक्षेप न करने देंगे।
ताहिर अली हताश हो गए। मन को समझाने लगे-ईश्वर दयालु है, क्या वह देखता नहीं कि मैं कैसी बेड़ियों में जकड़ा हुआ हूँ। मेरा इसमें क्या वश है? अगर स्वामी की आज्ञाओं को न मानूँ, तो कुटुम्ब का पालन क्योंकर हो। बरसों मारे-मारे फिरने के बाद तो