न करें, वह भी न करें, तो इज्जत कैसे रहे? कल को तेरा अहीर फिर लट्ठ लेकर आ पहुँचे तो? खुदा ने चाहा, तो अब वह लट्ठ उठाने लायक रह ही न जाएगा।

जमुनी थरथराकर पैरों पर गिर पड़ी और बोली-बीबी, जो हुकुम हो, उसके लिए हाजिर हूँ।

जैनब ने चोट-पर-चोट लगाई और जमुनी के बहुत रोने-गिड़गिड़ाने पर 25 रुपये लेकर जिन्नात से उसे अभय-दान दिया। घर गई, रुपये लाकर दिए और पैरों पर गिरी; मगर बजरंगी से यह बात न कही। वह चली तो जैनब ने हँसकर कहा-खुदा देता है तो छप्पर फाड़कर देता है। इसका तो सान-गुमान भी न था। तुम बेसब्र हो जाती हो, नहीं तो मैंने कुछ-न-कुछ और ऐंठा होता। सवार को चाहिए कि बाग हमेशा कड़ी रखे।

सहसा साबिर ने आकर जैनब से कहा-आपको अब्बा बुलाते हैं। जैनब वहाँ गई, तो ताहिर अली को पड़े कराहते देखा। कुल्सूम


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तीर्थ-यात्रा, पूजा-पाठ, स्नान-धयान, रोज़ा-नमाज, किसी का निशान भी न रहेगा। मसजिदें खाली नज़र आएँगी, और मंदिर वीरान!

ताहिर अली को भय ने परास्त कर दिया। स्वामिभक्ति औरर् कर्तव्‍य-पालन का भाव ईश्वरीय कोप का प्रतिकार न कर सका।


अध्याय 5

चतारी के राजा महेंद्रकुमार सिंह यौवनावस्था ही में अपनी कार्य-दक्षता और वंश प्रतिष्ठा के कारण म्युनिसिपैलिटी के प्रधान निर्वाचित हो गए थे। विचारशीलता उनके चरित्र का दिव्य गुण थी। रईसों की विलास-लोलुपता और सम्मान-प्रेम का उनके स्वभाव


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