जो कुछ भूल-चूक हुई, उसे माफ कीजिए, नहीं तो उजड़ जाएँगे, कहीं ठिकाना नहीं है।
जैनब-अब हमारे किए कुछ नहीं हो सकता। साहब बिना मुकदमा चलाए न मानेंगे, और वह न चलाएँगे, तो हम चलाएँगे। हम कोई धुनिये-जुलाहे हैं? यों सबसे दबते फिरें, तो इज्जत कैसे रहे? मियाँ के बाप थानेदार थे; सारा इलाका नाम से काँपता था, बड़े-बड़े रईस हाथ बाँधो सामने खड़े रहते थे। उनकी औलाद क्या ऐसी गई-गुजरी हो गई कि छोटे-छोटे आदमी बेइज्जती करें। तेरे लौंडे ने माहिर को इतनी जोर से दाँत काटा कि लहू-लुहान हो गया; पट्टी बाँधो पड़ा है। तेरे शौहर ने आकर लड़के को डाँट दिया होता, तो बिगड़ी बात बन जाती।लेकिन उसने तो आते-ही-आते लाठी का वार कर दिया। हम शरीफ लोग हैं, इतनी रियायत नहीं कर सकते।
रकिया-जब पुलिस आकर मारते-मारते कचूमर निकाल देगी, तब होश आएगा; नजर-नियाज देनी पड़ेगी, वह अलग। तब आटे-दाल का भाव मालूम होगा।
जैनब-गँवार तो हैं ही, तुम्हारे ही सिर हो जाएँ। तुम्हें साफ कह देना चाहिए कि मैं मुहल्लेवालों से दुश्मनी मोल न लूँगा, जान-जोखिम की बात है।
रकिया-जान-जोखिम तो है ही, ये गँवार किसी के नहीं होते।
ताहिर-क्या आपने भी कुछ अफवाह सुनी है?
रकिया-हाँ, ये सब चमार आपस में बातें करते जा रहे थे कि साहब ने जमीन ली, तो खून की नदी बह जाएगी। मैंने तो जब से सुना है, होश उड़े जा रहे हैं।
जैनब-होश उड़ने की बात ही है।
ताहिर-मुझे सब नाहक बदनाम कर