जब ईश्वर से विमुख होते देखती हूँ, तो मैं दु:ख और क्रोध से बावली हो जाती हूँ। तुम्हें मैं सच्चा, ईमान का पक्का, मसीह का भक्त बनाना चाहती थी। इसके विरुध्द जब तुम्हें ईसू से मुँह मोड़ते देखती हूँ; उनके उपदेश, उनके जीवन और उनके अलौकिक कृत्यों पर शंका करते पाती हूँ, तो मेरे हृदय के टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं, और यही इच्छा होती है कि इसकी सूरत न देखूँ। मुझे अपना मसीह सारे सांसर से, यहाँ तक कि अपनी जान से भी प्यारा है।
सोफ़िया-आपको ईसू इतना प्यारा है, तो मुझे भी अपनी आत्मा, अपना ईमान उससे कम प्यारा नहीं है। मैं उस पर किसी प्रकार का अत्याचार नहीं सह सकती।
मिसेज़ सेवक-खुदा तुझे इस अभक्ति की सज़ा देगा। मेरी उससे यही प्रार्थना है कि वह फिर मुझे तेरी सूरत न दिखाए।
यह कहकर मिसेज़ सेवक कमरे के बाहर निकल आईं। रानी और इंदु उधार से आ रही थीं।
ईश्वर सेवक ने सोफ़िया के कपोलों का चुम्बन करके कहा-बस, मेरा चित्ता शांत हो गया। ईसू तुझे अपने दामन में लें। मैं बैठता हूँ, मुझे ईश्वर-वाक्य सुना, कानों को प्रभु मसीह की वाणी से पवित्र कर।
सोफ़िया इनकार न कर सकी। 'उत्पत्ति' का एक परिच्छेद खोलकर पढ़ने लगी। ईश्वर सेवक ऑंखें बंद करके कुर्सी पर बैठ गए और तन्मय होकर सुनने लगे। मिसेज़ सेवक ने यह दृश्य देखा और विजयगर्व से मुस्कराती हुई चली गईं।
यह समस्या तो हल हो गई; पर ईश्वर सेवक के मरहम